देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव डघ् एसएस संधू ने हेस्को का भ्रमण कर वहां चल रहे विभिन्न प्रकार की तकनीकियों व ग्रामीण प्रयोगों को देखा। ड़ संधू ने हेस्को द्वारा पुनर्जीवित की गई आसन गंगा के संरक्षण के लिये भी प्रतिबद्घता जताते हुए कहा कि सिंचाई विभाग इस नदी की बेहतरी व इसको स्थायित्व देने के लिए कार्ययोजना बनायेगा, ताकि देश-दुनिया को इस नदी पर किये गये प्रयोगों को दिखाया जा सके।
हेस्को प्रमुख पद्मविभूषण ड़ अनिल जोशी ने बताया कि हेस्को ने आसन नदी का पुनरुद्वार कर प्रातिक तरीके से पानी लाने के रास्ते तैयार किए, इस प्रयोग से आसपास के वन्य जीवन व वन संरक्षण को मजबूती मिली। संधू ने कहा कि इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से जो भी संभव होगा व किया जाएगा। उन्होंने हेस्को के द्वारा विकसित किए कम लागत के पुल निर्माण तकनीक की भी सराहना की और विश्वास दिलाया कि सरकार इसमें भी सहयोग करेगी। उन्होंने हेस्को गांव में फल संरक्षण की ईकाई व विभिन्न तकनीकियों पर चल रहे प्रयोगों के साथ ही उन प्रयोंगों को भी देखा जो वन संरक्षण को नई दिशा दे रहे हैं, खासतौर से पुर्नजीवन के उस प्रयोग को देखा जिसमें किसी की मृत्यु के बाद उसकी राख को मिट्टी में मिलाकर बीज रोपित कर वृक्ष लगाते हैं। हेस्को के संस्थापक पद्मविभूषण ड़ अनिल जोशी से ड़ संधु से अनुरोध किया कि दूर-दराज के गांवों के साथ नलेज पार्टनरशिप की परिकल्पना पर काम किया जाए। ताकि गांव के पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक विज्ञान के समावेश का लाभ लिया जा सके। इसके लिए एक रूरल टेक्नोलजी डेवलपमेंट एण्ड डिलीवरी हब होना चाहिए। मुख्य सचिव ड़ संधू ने इसको स्वीकारते हुए अपनी सहमति दी और यह भी विश्वास दिलाया कि ऐसा कोई भी प्रयत्न जिसमें कि हेस्को एक तरह के प्रशिक्षण केन्द्र की भूमिका निभाए, उसमें राज्य सरकार पूरी तरह भागीदारी करेगी। डा़संधू ने कहा कि हेस्को जैसे संगठन की समाज को बेहद जरुरत है।

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